
पटना के राजीव नगर इलाके के नेपाली नगर स्थित बिहार राज्य आवास बोर्ड की अधिग्रहित भूमि पर पैसा और पैरबी की बदौलत दिन के उजाले में धड़ल्ले से अवैध निर्माण कार्य जारी है| नेपाली नगर (चंद्रविहार कॉलोनी) के रोड नंबर- 1, 5, 9 सहित राजीव नगर इलाके की अधिग्रहित भूमि पर चहुओर दिनों-रात अवैध निर्माण का काम जारी है| जबकि पटना उच्च न्यायालय के आदेश से बेपरवाह बिहार राज्य आवास बोर्ड के अधिकारी और स्थानीय पुलिस प्रशासन मुकदर्शक बना हुआ है|

ऐसा नहीं है कि राजीव नगर इलाके की अधिग्रहित भूमि पर नजर रखने के लिए स्थानीय थाना और आवास बोर्ड की गाड़ी दल-बल के साथ गली-गली फर्राटा नहीं भर रही है| ड्यूटी में तैनात पुलिस प्रशासन और आवास बोर्ड के लोग पूरी मुश्तैदी के साथ चौबीस घंटे पेट्रोलिंग के काम में जुटे हुए है, बावजूद इसके सैकड़ों की तादाद में निर्माण कार्य जारी है| इसका ज़िम्मेवार कौन है?
भू-माफियाओं पर नकेल कसने और 1024 एकड़ अधिग्रहित इलाके में अवैध निर्माण पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाने के लिए ही राजीव नगर में थाना के अलावा आवास बोर्ड का कैंप कार्यालय खोला गया था| बावजूद इसके बिहार राज्य आवास बोर्ड के अधिग्रहित भूखंड पर अवैध कब्जा और निर्माण की प्रक्रिया निरंतर चलती रही| समय-समय पर आवास बोर्ड के अधिकारी/कर्मचारी और थानाध्यक्ष बदलते रहे, लेकिन इतने वर्षों के बाद भी यदि यहाँ कुछ नहीं बदला तो वह है- अवैध निर्माण और कब्जा|
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्तमान समय में यहां बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण कार्य सिर्फ इसलिए हो रहे हैं क्योंकि इसमें भू-माफियाओं और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत है। यही वजह है कि अवैध निर्माण रोकने की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है| अवैध निर्माण रोकने की कार्रवाई अक्सर सिर्फ कागजों तक ही सिमटकर रह जाती है जिसका दुष्परिणाम है कि इस इलाके में भू-माफिया और दलालों की सक्रियता समय के साथ बढ़ती जा रही है| नाम नहीं छापने के शर्त पर स्थानीय लोगों ने बताया कि राजीव नगर आवास बोर्ड के कार्यपालक अभियंता का कहना है कि नववर्ष के अवसर पर बिहार राज्य आवास बोर्ड मुख्यालय के शीर्ष अधिकारियों को उपहार भेंट करनी है इसलिए निर्माण कार्य कराने के एवज में मोटी रकम देनी पड़ेगी जिससे इलाके में भू-माफियाओं और दलालों की सक्रियता पुनः इन दिनों काफी बढ़ गयी है| इस प्रकार मोटी रकम उगाही करने की होड़ में जुटे आवास बोर्ड और स्थानीय पुलिस की माफियाओं से बढ़ी गठजोड़ के कारण अवैध निर्माण कार्य चहुओर जारी है| इसके विरुद्ध स्थानीय थाना में न शिकायत दर्ज की जा रही है और न ही कोई दंडात्मक कार्रवाई| ऐसी स्थिति में अवैध निर्माण पर रोTक कौन लगाएगा और कब?

हाईकोर्ट आदेश की उड़ रही धज्जियां, स्थानीय थाना और आवास बोर्ड बना मुकदर्शक
गौरतलब है कि वर्ष 2018 से पहले अधिग्रहित भूमि पर निर्मित मकानों को छोड़कर नए निर्माण पर पूरी तरह प्रतिबंध है। यह प्रतिबंध पटना हाईकोर्ट के आदेश और दीघा लैंड सेटलमेंट एक्ट 2010 के तहत लगी है। इसके बावजूद यहां चल रही अवैध निर्माण और दखल जैसी गतिविधियां नियमों की खुली धज्जियां उड़ा रही हैं और ज़िम्मेवार अधिकारी तमाशबीन बने हुए हैं|