फ्रांस की पत्रिका के दफ्तर पर आतंकी हमला, 12 की मौत

रिपोर्ट: साभारः

पेरिस। आतंकवाद के कहर से अब तक दूर रहे फ्रांस को निशाना बनाया गया। राजधानी पेरिस में बुधवार को एक विवादास्पद फ्रेंच पत्रिका के दफ्तर पर आतंकी हमला हुआ। पैगंबर के अपमान का बदला लेने का ऐलान करते हुए दो सशस्त्र नकाबपोशों ने राकेट लांचर और कालशनिकोव रायफलों से अंधाधुंध फायरिंग की। इसमें दो वरिष्ठ संपादक, कार्टूनिस्ट समेत बारह लोग मारे गए। मृतकों में दो पुलिस कर्मी भी हैं। हमलावरों ने चार्ली हेब्दो पत्रिका के मुख्यालय की इमारत में घुसने के बाद पैगंबर का बदला लिया जैसे जुमले चिल्लाते सुने गए। दोपहर के वक्त हुए इस आतंकी हमले में दफ्तर में खून की होली खेली गई जिसमें बारह लोग मारे गए। सुरक्षा बलों ने जवाबी फायरिंग की। इमारत से बाहर निकलते हुए भी आतंकियों ने अंधाधुंध फायरिंग हुई। मरने वालों में पत्रिका के संपादक समेत तीन पत्रकार और दो पुलिस कर्मी शामिल हैं। घायल दस अन्य लोगों में कई की हालत बहुत गंभीर है। इस खूनखराबे के बीच आतंकी एक कार अपने कब्जे में लेकर पूर्वी पेरिस की ओर भाग निकले। पेरिस में सर्वोच्च अलर्ट सरकार ने समूचे वृहद पेरिस क्षेत्र में सर्वोच्च अलर्ट जारी किया है। फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वां ओलांद ने हमले के बाद मध्य पेरिस स्थित घटनास्थल का मुआयना किया। उन्होंने मीडिया को बताया कि चार्ली हेब्दो पत्रिका के दफ्तर पर गोलीबारी एक आतंकी हमला है। हालांकि अभी तक किसी आतंकी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। हालात का जायजा लेने के लिए ओलांद ने आपात कैबिनेट बैठक बुलाई। मोदी ने की हमले की निंदा इधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेरिस के आतंकी हमले की कड़ी भ‌र्त्सना करते हुए कहा कि ये बहुत ही घृणित कृत्य है। उनकी संवेदनाएं फ्रांस के लोगों के साथ हैं। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड केमरून ने पत्रिका के दफ्तर पर आतंकी हमले की निंदा करते हुए इसे बीमार मानसिकता करार दिया। इस्लाम विरोधी मानी जाती है पत्रिका उल्लेखनीय है कि इस्लाम विरोधी मानी जाने वाली चार्ली हेब्दो नामक पत्रिका धार्मिक कट्टरवाद पर तंज कसती रही है और इसने फरवरी 2006 में दानिश अखबार जायलैंड पोस्टेन में छपे पैगंबर मोहम्मद के कार्टूनों की श्रृंखला को वर्ष 2011 में दोबारा प्रकाशित किया था। हाल ही में चार्ली हेब्दो के एकाउंट पर किए गए ट्वीट में आतंकी संगठन आइएस सरगना अबू बकर अल बगदादी का भी मजाक बनाया गया था। इस पत्रिका के संपादक स्टीफेन कारबोनियर को हत्या की धमकी मिल चुकी थी और उन्हें पुलिस सुरक्षा मिली हुई थी।


Create Account



Log In Your Account